2020
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GIR Ahinsak Gau Ghee 1ltr

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Benefits:-

• Normalizes Vata and Pitta doshas. Nourishes the body.
• GIR Gau Ghee is an excellent home remedy to improve digestion and cure constipation.
• Brain tonic - excellent for improving memory and intelligence.
• Anti-cancer properties - having power to stop growth in cancer cells.
• Strengthens immune system and vitality.
• Good for voice, eyes and vision.
• Good for building stamina.
• Excellent for glowing skin.
• Excellent for increasing appetite.



Product Description:

Ahinsak - Gir Gau Ghee is prepared using the traditional "bilona" method. It is prepared from A2 milk obtained from Gir Gomata (Cow) using the ancient Indian practice of “dohan”. According to Shastra’s (ancient Indian treatises), dohan (derived from “do” meaning two) literally means the calf is allowed to feed to its satisfaction from two “anchals”, while the remaining two can be used to obtain milk for other living beings including humans. We never get rid of older non-lactating Gaumata's or Nandi's. Our Gomata's are reared unrestricted according to principles of nature, and left to grace on an organic field. We do not use modern artificial interventions to induce breeding or increase milk production.



वैदिक गोपालन 
गुजरात की शुद्ध गीर प्रजाति के ७०० से वधू गौमाता और नंदी, जिसके १८ विभिन्न गोत्र हमारी गौशाला में उपस्थित है  उनका यहाँ वैदिक परंपरा अनुसार पालन किया जाता है। प्राचीन भारतीय वेदों, शास्त्रों में दिव्य गौमाता के पालन के निर्देश दिये है । जैसे ऋगवेद के अनुसार, "हमें गाय को अपनी माता समान उत्तम सेवा कर के उन्हें हमेशा हर तरह से सुखी रखना चाहिए।" गौमाता की इस तरह से सेवा करने से वह संतुष्ट और प्रसन्न होती है। और वेदों, शास्त्रों के अनुसार, संतुष्ट गौमाता के गव्य (दूध, घी, दहि, गोमूत्र और गोमय) मंगलमय और कल्याणकारी सिद्ध होते हैं। गीर अहिंसाक गौ घी बंसी गीर गौशाला के ऐसे संतुष्ट और स्वस्थ गौमाताओं से प्रपट हुआ घी है। 

बिन शोषणकारी
हम कभी भी दूध न देनेवाले गौमाता या नंदी को अलग नहीं करते और खोराक और पानी परोसने में कभी भेद भाव नहीं करते। हम दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए या प्रजनन के लिए अप्राकृतिक गर्भाधान या हॉरमोन इंजेकशन जैसी आधुनित तकनीकों का उपयोग भी नहीं करते। हमारे गौशाला में १५-२५% गौमाताएँ दूध देते हैं, जब की आधुनिक डेरी में यह आकडा सामान्य तरीके से ४०-७०% होता है। गौमाता की देख भाल संपूर्ण प्रकृतिक तरीके से की जाती हैं।

अहिंसक
यहाँ दूध प्राप्त करने की प्राचीन भारतीय वैदिक बिन शोषणकारी "दोहन" पद्धति का अनुसरण होता है जिसमे बछड़े का दो आंचल के ऊपर संपूर्ण अधिकार होता है। और बाकी के दो आंचल से मनुष्यों के लिए दूध प्राप्त होता है। बंसी गीर गौशाला में कीसी भी गौमाता को बांध कर नहीं रखा जाता, हर गौमाता का नाम होता है दोहन के समय का द्रश्य देखने योग्य होता है । जब करीब 100 गौमाता के जुंड में से एक को नाम से बुलाया जाता है और वह बाहर आती है। सुंदरता तब बढती है जब मां का नाम सुनकर 15 दिन का बछडा भी बाहर आता है मां का दुध पीने के लिए। 

वैदिक यज्ञ और ध्वनी
गौशाला के दैवीय वातावरण की पवित्रता को बनाए रखने के लिए यहाँ हर रोज़ वैदिक यज्ञ किया जाता है और गौमाता की पूजा और अर्ति भी की जाती है। हर रोज़ गौशाला परिसर में ओमकार और वैदिक स्तोत्र बजाए जाते हैं जिस से गौमाता आनंदमय और स्वस्थ रहती हैं।

शुद्ध सात्विक और आयुर्वेदिक आहार
गौमाता को प्रकृतिक खाद से सींचे हुए गौचर में चराने ले जाया जाता है। इसके उपरांत गौमाता को नैतिक और प्रकृतिक तरीके से उगाया हुआ सूखा घास खिलाया जाता है और हमारे अपने खेत में उगाया हुआ ताज़ा हारा चारा दिया जाता है। गौमाता का सूखा चारा नॉन-जीएमओ घटकों से बनाया जाता है। जैसे की देसी कपास के दाने, शुद्ध प्रकृतिक अनाज, शुद्ध देसी गुड, इत्यादि। गौमाता के आहार में ऋतु और गौमाता के स्वस्थ्य के अनुसार आयुर्वेदिक जडीबुटीयों का समावेश भी होता है।

वैदिक बिलोना प्रक्रिया अनुसार
गीर अहिंसक गौ घी वैदिक बिलोना प्रक्रिया अनुसार बनाया जाता है। इसे बनाने में मलाई नहीं लेकिन समूचे दूध का उपयोग होता है जिसके कारण एक लिटर घी बनाने में २५ से ३५ लिटर दूध इस्तेमाल होता है। इस दुध को जमा कर दंही बनाया जाता है और फिर उसका बिलोना किया जाता है। मक्खन का लकडी की धीमी आँच पे तांबे के बर्तन में घी बनता है । एसे घी का आयुर्वेद में बड़ा महत्व है। 

गीर अहिंसक गौ घी के लाभ
गीर अहिंसक गौ घी का वर्ण (ईषत् पीतकम्) चरक संहिता के अनुसार हमारे शरीर के ओजस से एकरूप है। वेदों के अनुसार संतुष्ट गौमाता के गव्य कल्याणकारी और मंगलकारी सिद्ध होती है। आयुर्वेद के अनुसार ऐसे गौमाता से प्राप्त हुआ घी बुद्धि, स्मृति, मेधा, अग्नि (पाचन क्षमता और जीवन क्रिया), बल, आयु, शुक्र (प्रजनन क्षमता), ओजस और चक्षु (दृष्टि) सुधरता है। ऐसा घी उज्ज्वल वर्ण, सौन्दर्य और आवाज़ को मधुरता प्रदान करता है। यह घी विशेष रूप से वात और पित्त दोष के लिए लाभकारक है, और शारीरिक अथवा मानसिक आघात में से अथवा शस्त्रक्रिया (सर्जरी) में से बाहर आए दर्दियों के लिए उत्तम है। ऐसा घी बुखार, विश (जहर), उन्माद, दुर्बलता और अलक्ष्मी के प्रभाव भी दूर कर सकता हैं।

Outcome of Vedic Gopalan  

•  Gift of Ayurveda •  Blessing of Gaumata

Odoo • Image and Text

Colour of Ojas

Gir Ahinsak Gau Ghee generally tends to be slightly yellow in colour, the same colour as “Ojas” (our essential energy that resides in the heart) that Maharshi Charaka described when he compared the colour of Ojas with the colour of Ghee.

Sattvik Ahaar

Gir Ahinsak Gau Ghee is a natural handmade product - smell, taste, colour & consistency may vary depending upon weather, feed & other conditions. This Ghee’s Purity & Authenticity remain unchanged. 

 

Odoo • Text and Image
Odoo • Image and Text

Aushadhiya  

Colour of Gir Ahinsak Gau Ghee may get whiter as it ages, a highly desirable quality in Ayurveda which considers older Ghee to be more potent for medicinal uses compared to fresh Ghee. Bansi Gir Gauveda uses whiter aged Ghee for making medicines & supplements.



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